Now playing

छोड़ दिया वो रास्ता
जिस रास्ते से तुम थे गुज़रेछोड़ दिया वो रास्ता
जिस रास्ते से तुम थे गुज़रे
तोड़ दिया वो आईना
जिस आईने में तेरा अक्स दिखे

मैं शहर में तेरे था गैरों सा
मुझे अपना कोई ना मिला
तेरे लम्हों से, मेरे ज़ख्मों से
अब तो मैं दूर चला..

रुख ना क्या उन गलियों का
जिन गलियों में तेरी बातें हो

छोड़ दिया वो रास्ता
जिस रास्ते से तुम थे गुज़रे

मैं था मुसाफ़िर राह का तेरी
तुझ तक मेरा था दायरा
मैं भी कभी था मेहबार तेरा
खानाबदोश मैं अब ठहरा
खानाबदोश मैं अब ठहरा..

छूता नहीं उन फूलों को
जिन फूलों में तेरी खुशबू हो
रूठ गया उन ख़्वाबों से
जिन ख़्वाबों में तेरा ख़्वाब भी हो

कुछ भी न पाया मैंने सफर में
होके सफर का मैं रह गया
कुछ भी न पाया मैंने सफर में
होके सफर का मैं रह गया

कागज़ को बोशीदाघर था
भींगते बारिश में बह गया
भींगते बारिश में बह गया

देखूं नहीं उस चांदनी को
जिस में के तेरी परछाई हो
दूर हूँ मैं इन हवाओं से
ये हवा तुझे छू के भी आयी न हो

Added by

Ayushi

SHARE

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ADVERTISEMENT

VIDEO

Now playing