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मेहरबानी है तकदीरों की
जो तेरी राहें यूँ आ के मिली है

है ये कहानी उन लकीरों की
जो तेरे मेरे हाथों की जुड़ रही हैं

इक रेत का सेहरा हूँ मैं
बारिश की फिज़ा है तू
आधा लिखा इक खत हूँ मैं
और खत का पता है तू

तू अगर काश समझ पाए
मेरे लिए क्या है तू
अगर काश समझ पाए
मेरे लिए क्या है तू

वो ओ..

Added by

Ayushi

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