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सुन ज़ालिमा मेरे

सानू कोई डर ना

की समझेगा ज़माना

तू वी सी कमली

मैं वी सा कमला

इश्के दा रोग सयाना

इश्के दा रोग सयाना..

सुन मेरे हमसफ़र

क्या तुझे इतनी सी भी खबर

सुन मेरे हमसफ़र

क्या तुझे इतनी सी भी खबर

कि तेरी सांसें चलती जिधर

रहूंगा बस वहीं उमर भर

रहूंगा बस वहीं उम्र भर, हाए

जितनी हसीं ये मुलाकातें हैं

उनसे भी प्यारी तेरी बातें हैं

बातों में तेरी जो खो जाते हैं

आऊं ना होश में मैं कभी

बाहों में है तेरी जिंदगी, हाये

सुन मेरे हमसफ़र

क्या तुझे इतनी सी भी खबर

ज़ालिमा तेरे इश्क 'च मैं

हो गई आ कमली...हाय..

मैं तो यूं खड़ा

किस सोच में पड़ा था

कैसे जी रहा था मैं दीवाना

छुप के से आके धुन

दिल में समा के तूने

छेड़ दिया कैसा ये फसाना

ओ...मुस्कुराना भी तुझसे सीखा है

दिल लगाने का तू ही तरीका है

ऐतबार भी तुझसे होता है

आऊं ना होश में मैं कभी

बाहों में है तेरी जिंदगी, हाय!

है नहीं पता

के तुझे मान लूंगा खुदा

कि तेरी गलियों में इस क़दर

आऊंगा अब हर पीहर...

सुन मेरे हमसफ़र

क्या तुझे इतनी सी भी खबर

कि तेरी सांसें चलती जिधर

रहूंगा बस वहीं उमर भर

रहूंगा बस वहीं उम्र भर, हाए

ज़ालिमा तेरे इश्क 'च मैं..'

Added by

Ayushi

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