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हाँ हाँ हाँ!

जो जानता नी उनको भी परिचित लगूं
बना मैं शक से नी बेवकूफ करुंगा क्लियर
मैं माल फुके ना लिखूं ये बूढ़ी तेज़ इतनी
एल्बम'एइन बना के फेकुन एक नीचे ना मिलियन

मैं मौज-मस्ती जैसा देसी और बिल्जेरियन
जो खाते खार साले बैठे आज मंडप
कल ही शाम ऐसी बंदी से मिला था जिसका
नाम पीछे कौर पर वाइब थी ब्राजीलियाई

खेलें हम आग और खेलते हम राग से
ये बच्चे कितने भी बड़े, बड़े ना बाप से
मैं नाम राशि ऐसी रखके घूमता हूं
बंदे कहते काम करने का तरीका सीखें आपसे

हां खुल्ला खाना, खुद कामना
खुल्के जीना, जिनसे मिलता, सब हसीना
जैसा घूमता बहारों में

हां हूं कमीना, पर नगीना
लइके घूमूं, हर महिना
पूरा साल जैसा जीता हूं त्योहारों में

हां थोड़ा पापी, मैं गाली देता काफी
पर जिंदगी में बदन के लिए कभी ना चाटी
तीन बटन से बहार छटी, चमके मारे गर्व से
और भाईचारा राखे ना करते हम जाते

हल्ला काटे पूरा झुंड से डर ना करते
करे फटे पूरी अधूरी जंग लड़ा ना करते
आगाज़ मार दे अंजाम से जो पहले
हम वो काल बेटा जिनके हाथ रोशनी धरा ना करते

खड़ा घमंड हुआ तो बात क्यों बैठते हो?
कामज़ोर देखके ही हाथ क्यूँ उठते हो?
अकेले मोड़ दी कलै अफलातूनो की
तो दुनिया हमसे कहती है इतना कहके क्यू जानती हो?

जो राज़ रखले ऐसा राज़ किससे राजी है?
मैं हार के भी जीता खेली ऐसी बाजी है
ये सच पसंद नहीं तो कान अपना करलो बंद
मैं धीरे-धीरे फाडू बेटा कोंसी जल्दी बाजी है

आंखें बंद करके भी मैं देखूं दुनिया को
ये दुनिया गैरों से भी ज्यादा अपनों से मेरी हुई
मुट्ठी खोल के मैं क्या ही लूंगा अपनो से
जो अपनों की हाय आंखें मेरे चेहरे से जली हुई

मेरे हाथ दोनों बांध दोगे झूठे इल्ज़ामो से
तो मान लूंगा गैरों के तुम साथ हो
मगर हर बात का जवाब देता है ये वक्त
मेरी बातें कड़वी या तुम कितने दिल के साफ हो

आज भी शिकन ना माथे पे तुम देखोगे
चाहे खड़ा अकेले चाहे कितने पीछे वार हो
भले मंजूर ना हो दुश्मनों से हारना
पर दिल के टुकड़े होते हैं जब दुश्मनों में यार हो

एक दिन जब पता चलेगा सच तो
पैर जमीन छोड़ देंगे आंखें खुद से रूठ जाएंगी
हम तो बैठे होंगे पहुछ से भी दूर
बेख़बर तब जानी कड़वी ही ये बातें तुमको खायेंगी

अपना क्या है हम तो बंदे ही हैं मूड के
जहां मिलेगा प्यार हम वहीं पे दिल लूटेंगे
हमसे क्या ही पाओगे तुम दिल दुखाके
हम तो इसकी भी नज़्म बनाके प्यार लूटेंगे जाएंगे

तीन नशे द प्यारे एक और जुड़ गया है
तार्रक्की कहती राजा मुझको लईके उड़ गया है
कहती पकड़ में मैं ना आती अच्छे आचो के
पर तुझमें ऐसा क्या है मेरा पूरा ध्यान मुड़ गया है

अब कहती हार का जुआ भी जीतेगा
मैं लिख के देती हूं जमाना तेरे लिए रुक गया है
अगर पता चले फरक तो मर्ज़ कोसेगा
मैं क्या हूं दावा तू खुद जहर जो पीके उठ गया है

गीत की जानकारी

फिल्म का एक गीत है। इस गीत को ने गाया है। गीत के बोल ने लिखे हैं और संगीत ने दिया है। गीत का निर्देशन ने किया है और निर्माण ने लेबल के अंतर्गत किया है। इस गीत में और नजर आते हैं।

गीत पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • "" गीत किसने गाया है?
    "" गीत ने गाया है।
  • "" गीत किस फिल्म से है?
    "" गीत फिल्म से है।
  • "" गीत के बोल किसने लिखे हैं?
    "" गीत के बोल ने लिखे हैं।
  • "" गीत का संगीत किसने दिया है?
    "" गीत का संगीत ने दिया है।
  • "" गीत में कौन अभिनेता और अभिनेत्री हैं?
    "" गीत में और नजर आते हैं।

Added by

Ayushi

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