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छोटा सा फ़साना
किसी को पता ना
इसे क्या सुनाना
चल पड़े हैं जो हम
अब कैसा बहाना
इसे है निभानाये सफ़र है नया
क्या से क्या हो गया
आगे क्या है आना

बेखबर मैं यहाँ
बेफिक्र है जहां
किसे क्या बताना
की दिल मेरा हो
है बंजारा हो.
पर मन फिर भी हो
ये माने ना
खुली आँखें देखे
मंज़र नया सा है
देखो राहें पूछे
मंजिल मेरी कहा है
हो पता लापता
किसी को क्या पता
की मुझे जाना है कहाँ
इस सफ़र की वजह
है ये फ़र्ज़ या सज़ा

ये मैंने जाना है कहाँ
की दिल मेरा हो
है बंजारा हो.
पर मन फिर भी हो
ये माने ना

Added by

Ayushi

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