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ए ख़तम-ए-रसूल, काबा-ए-मकसूद तू ही
दर सूरत-ए-हर चे हस्त मौज़ूद तू ही
आयत-ए-कमाल-ए-हक अयान अस्त ब-तो
आन जात के दर परदा निहान बूद तू ही

सुहानी रात थी,
सुहानी रात थी और पुर-सुकून ज़माना था
असर में डूबा हुआ जज़्ब-ए-आशिकाना था
उन्हें तू अर्श पे मेहबूब को बुलाना था
हवस थी डीड कि मिराज तो बहाना था

सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी

सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी

ये कमाल-ए-हुस्न का मोअज्जज़ा
के फ़िराक़ हक़ भी न सह सका
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी

शब-ए-मेराज लिया अर्श-ए-बरीन पर बुलावे
शब-ए-मेराज लिया अर्श-ए-बरीन पर बुलावे
सदमा-ए-हिजर ख़ुदा कहे भी गवारा न हुआ, न हुआ
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी

सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
सू-ए-मुन्तहा वो चले नबी

कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही

कोई हद है उनके उरोज की
बलाघल उला बी कमालीही

सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
कोई हद है उनके उरोज की
सर-ए-ला-मकान कहो तलब हुई
कोई हद है उनके उरोज की

खैर-उल-वारा, सद्र-उद-दुका नज्म-उल-हुदा नूर-उल-उला
खैर-उल-वारा, सद्र-उद-दुका नज्म-उल-हुदा नूर-उल-उला

शम्स-उद-दुआ, बदर-उद-दुजा, यानी मुहम्मद-ए-मुस्तफा

कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
जो गया है फर्श से अर्श तक
वो बुराक़ ले गया बे-धड़क

तब्क़-ए-ज़मीन वारक़-ए-फ़लक
गए नीचे पांव से पुल सरक

लातें जुल्फ की जो गई लटक
तोह जहां सारा गया महक
हुए मस्त बुल्बुलिएन इस कदर
तो ये गुंचे बोले चटाक चातक

कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की

रुख-ए-मुस्तफा की ये रोशनी
ये तजल्लियों की हमाहमी
रुख-ए-मुस्तफा की ये रोशनी
ये तजल्लियों की हमाहमी

के हर एक चीज़ चमक उठी
के हर एक चीज़ चमक उठी
कशफद-दुजा बि-जमालिही
के हर एक चीज़ चमक उठी
कशफद-दुजा बि-जमालिही

कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही
कोई हद है उनके उरोज की
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही

ना फलक ना चांद तारे ना शहर ना रात होती
ना फलक ना चांद तारे ना शहर ना रात होती
ना तेरा जमाल होता ना हां कायनात होती

कोई हद है उनके उरोज की
कोई हद है उनके उरोज की
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही
कोई हद है उनके उरोज की
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही

ऐ मज़हर-ए-नूर-ए-खुदा
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही
ऐ मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा
बालाग़ल-उला-बि-कमअलिही

मौला अली मुस्किल-कुशा
कशफद-दुजा बि-जमालिही
मौला अली मुस्किल-कुशा
कशफद-दुजा बि-जमालिही

हुस्नैन जान-ए-फातिमा
हसुनत जमीउ ख़िसअलिहि
हुस्नैन जान-ए-फातिमा
हसुनत जमीउ ख़िसअलिहि

बलघल उला बी कमालअही गीत की जानकारी

बलघल उला बी कमालअही फिल्म बालाघल-उला बी-कमअलिही (एकल) का एक गीत है। इस गीत को अली जफर ने गाया है। गीत के बोल बेदम शाह वारसी ने लिखे हैं और संगीत बाकिर अब्बास ने दिया है। गीत का निर्देशन अदनान तारिक ने किया है और निर्माण अली जफर ने फ्रीबर्ड रिकॉर्ड्स लेबल के अंतर्गत किया है। इस गीत में अली जफर और नजर आते हैं।

बलघल उला बी कमालअही गीत पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • "बलघल उला बी कमालअही" गीत किसने गाया है?
    "बलघल उला बी कमालअही" गीत अली जफर ने गाया है।
  • "बलघल उला बी कमालअही" गीत किस फिल्म से है?
    "बलघल उला बी कमालअही" गीत बालाघल-उला बी-कमअलिही (एकल) फिल्म से है।
  • "बलघल उला बी कमालअही" गीत के बोल किसने लिखे हैं?
    "बलघल उला बी कमालअही" गीत के बोल बेदम शाह वारसी ने लिखे हैं।
  • "बलघल उला बी कमालअही" गीत का संगीत किसने दिया है?
    "बलघल उला बी कमालअही" गीत का संगीत बाकिर अब्बास ने दिया है।
  • "बलघल उला बी कमालअही" गीत में कौन अभिनेता और अभिनेत्री हैं?
    "बलघल उला बी कमालअही" गीत में अली जफर और नजर आते हैं।

Added by

Ayushi

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