आ रात भर…
आ रात भर…
जाएँ ना घर… जाएँ ना घर
है साथ तू… क्या है फ़िक्र
जाएँ ना घर… आ रात भर

जाएँ जहां जहां जहां दिल करे
जाने कहाँ कहाँ कहाँ फिर मिले
इस रात में बीते उमर, सारी उमर
आ रात भर…जाएँ ना घर

नमकीनीयां हैं, नजदीकियां हैं
रंग ही रंग है नज़ारों में
हंसने लगी हूँ, फंसे लगी हूँ
अरमान दिल में हज़ारों हैं

तो पार दे सभी हदें
गले लगे कभी नहीं होने दे सहर
इस रात में बीते उमर, सारी उमर

आ रात भर…आ रात भर…
आ रात भर…आ रात भर…
जाएँ ना घर…जाएँ ना घर…
आ रात भर
आ रात भर…आ रात भर…

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